पिछला भाग पढ़े:- मैं, मां और ट्रेन का सफर-2
हैलो दोस्तों, अगर किसी स्त्री और पुरुष को सेक्स संबंधी कोई सलाह लेनी हो और अपनी स्टोरी भेजनी हो, तो इस स्टोरी के पहले भाग में ईमेल दी हुई है। उस पर हमें संपर्क करे। आपके कमेंट और ईमेल बहुत कम आ रहे हैं। जिस वजह से स्टोरी बहुत देरी से आ पाती है।
तो पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मैंने अपने पापा को काल लगा दी थी। तो मां अपने कपड़े उतारने लगी और मुझसे काल कट करने को बोलने लगी।
मैं: पहले उतारो तभी ही कट होगी।
मां ने इतना सुनते ही अपनी नाईटी उतारी और साइड में फेंक दी। उनके दोनों चूचे और चोड़ी गांड को काले रंग की ब्रा-पेंटी में देख कर मेरा 8 इंच लम्बा लंड झटके लेने लगा। तब तक पापा ने फोन उठाया और बोले-
डैड: हां बेटा बोलो (इस पर मां ने मुझे हाथ जोड़ कर बताने को मना किया)।
मैंने बात बदलते हुए कहां-
मैं: हैलो डैड, हम सोने जा रहे है। तो आप टेंशन ना लेना ( मैंने मां को इशारा करते हुए सारे कपड़े उतार कर झुकने को कहा)।
डैड: ठीक है बेटा।
पर फिर से मां इशारे से ही मिन्नतें करने लगी। इस पर मैंने कहां-
मैं: डैड आपको कुछ बताना था (मैंने उन्हें आंखें दिखाते हुए)।
डैड: हां बोलो बेटा, क्या कहना है?
इतने में ही मां ने जल्दी से अपनी ब्रा-पेंटी उतार कर फेंकी और झुक गयी। उनकी बिना बालों की गोरी चूत और झुकने पर उनकी चौड़ी और गोल गांड को देख कर मेरा लंड पहली से ज्यादा अकड़ गया। मैंने जल्दी से डैड को बोला-
मैं: वहीं पहुंच कर ही बताता हूं डैड, गुडनाईट।
डैड: ठीक है, बेटा गुडनाईट।
मैंने जल्दी से कूप को अच्छे से बंद करके सारे पर्दे लगा दिये। और मोबाइल में आफ स्क्रीन विडियो रिकार्डिंग शुरू करके रख दिया ताकि मेरे पास सबूत रहें। फिर अपना कच्छा उतरा कर फेंक दिया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था और चुदाई किये हुए भी मुझे लगभग 20 दिन हो गये थे।
मां ने मुझे कहां: बेटा ये मत कर, ये गुनाह है।
पर मेरे दिमाग में हवस सवार हो गयी थी। और मैंने नीचे बैठ कर मां को थोड़ा घुमाया जिससे उनकी गांड सीट से थोड़ा बाहर हो गयी। फिर उन्होंने अपने हाथ कूप की दीवार पर रखें और मैं उनके पीछे खड़ा हुआ तो मां ने अपनी गर्दन पीछे घुमा कर कहा-
मां: बेटा ये मत कर, अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा?
मैं: ये तब नहीं सोचा। जब उस अजनबी लड़के से बाथरूम में चुदाने को तैयार थी।
मां ने अभी तक मेरा लंड नहीं देखा था क्योंकि मैं उनके ठीक पीछे खड़ा था।
मां: बेटा (तभी मैंने नीचे बैठ कर उनकी चूत पर मुंह लगा दिया), आहहह।
मैं: चुप रहो और मजा करों।
और मैं जीभ से उनकी चूत से खेलने लगा।
मां: अआआहहह बेटा, रूक जा।
मममममा अआआहहह की सिसकारियां निकालने लगी। मां भी मेरे उनकी चूत को चाटने की वजह से गर्म होने लगी थी। मैं लगातार मां की चूत चाटने लगा। उनकी चूत एक-दम कसी हुई और सबसे ज्यादा कामुक मुझे तो मां गांड लग रही थी। जिसे देख कर मुझसे रहा नहीं गया। मुझे पता होता मां के साथ करने में इतना मजा आता है, तो पहले ही ट्राई कर लेता। मुझे मां की चूत चाटने में मेरी गर्लफ्रेंड प्रिया से भी ज्यादा मजा आ रहा था। और एक नये एहसास से मेरा लंड और ज्यादा अकड़ कर मोटा हो गया था।
मां: अआआहहह बेटा अआहह ये गुनाह है।
मां की चूत चाटते और उनकी चूचियों को दबाते हुए मुझे 5 मिनट हो गये थे। इससे अब उनकी चूत से रस निकलने लगा था। अब मैंने चूत की चटाई बंद की और फिर मैं खड़ा हुआ। मां ऐसे ही कुतिया की तरह झुकी हुई थी, और तेज सांसें लेते हुए बोली-
मां: मत कर बेटा, रूक जा अब।
मैं: चुप रहो, अब मेरा लंड लेने को तैयार हो जाओ।
फिर मैंने अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और उनकी चूत पर लंड को सेट किया। मेरा 8 इंच से भी लम्बे मोंटे लंड के आगे उसकी चूत का छेद पूरी तरह ढक गया था। तभी मां बोली-
मां: बेटा रूक जा (मैंने मां को कस कर पकड़ा, क्योंकि मैं ये मोका नहीं जाने देना चाहता था)।
मैं: चुप मां, ये लो (बोल कर एक जोर का झटका मार दिया, जिससे मेरा लंड लगभग आधे से ज्यादा लंबा लंड उनकी चूत में चला गया। जिससे मां की चीख निकल गई।
मां चीख पड़ी: उईई मां… मर गई रे… ओह्ह… बाहर निकाल बेटा… नहीं तो मैं मर जाऊंगी। बहुत मोटा है, प्लीज़ बेटा, थोड़ा रहम कर अपनी मां पर! अहहाआ छोड़ दें।
पर मैंने उनकी एक ना सुनी और एक और ज़ोरदार व करारा धक्का दे मारा। मेरा लौड़ा मां की चूत के अन्दर समा गया बस थोड़ा ही बाहर बचा था। मां की तेज चीख से लगा कि उनकी चूत पूरी तरह फट चुकी थी, और उनकी गांड दर्द की वजह से कंपकंपी करते हुए हिलने लगी।
मां की आंखों से थोड़े आंसू बहने लगे थे। मां मुझे लंड बाहर निकालने को बोलने लगी। मैंने पहले ही अपनी मां को इतना टाइट पकड़ा था कि वह आगे को भाग नहीं सकती थी।
मां: अआआह मां मर गयी।
मां झुकी हुई पीछे की और देख कर दर्द में बोली: बेटा दर्द हो रहा, रूक जा। अआआहहह मां, तेरा तो बहुत बड़ा है। अअआआहह मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा अआआआ मममाआ।
एक बार तो मां की दर्द भरी चींखें सुन कर मैंने रूकने की सोचा। पर मुझे उनकी चूत की गर्मी लंड पर बर्दाश्त नहीं हुई । मां की चूत प्रिया से भी ज्यादा गर्म थी और मां की दर्द भरी चींखें सुन कर पता नहीं क्यों मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गया। तभी मैंने कस के पकड़े हुए एक और जोरदार झटका मारा, जिससे मेरा पूरा लंड मां की चूत में उतर गया जिससे वो चीखने अअआआहह फट गयी आहहह निकाल लें मर जाउंगी के साथ छटपटाने लगी, और उनकी गांड कांपनी शुरू हो गयी। पर मुझ पर ये सब सुन कर पता नहीं कौन सा भूत सवार हो गया, और मुझे ये सब सुन के उत्तेजना होने लगी। फिर मैंने लगातार तेज झटके देने शुरू कर दिये, जिससे मेरी मां की चीख़ों के साथ सिसकारियां भी निकल गयी थी।
मां: बेटा अआआह मां रहने दें। मत कर दर्द हो रहा अअआआहह आररराम से।
मैं: बाहर चुदवाती हो, ये लो (बोल कर तेज धक्के देने लगा)।
और मैं लगातार मां को चोदे जा रहा था। जिससे पूरे केबिन में थपथप थपथप अअआआहह आररराम से बेटा अआआह ममममा की आवाजें गूंज रही थी। मुझे ऐसे चोदते हुए 5 मिनट ही हुए थे, कि मां की सिसकारियां और चींखें अब मजे में बदलते हुए मुझे एहसास हुआ। मैंने उनकी गोरी गांड पर एक-दो थप्पड़ जड़ें और तेजी से चोदने लगा।
मां: अअआआहह बेटटा अअआआहह नहीं दर्द होता है।
मैं: उनके चूचे दबाने लगा और वो भी मज़े में अब नीचे मुंह करके सिसकारियां ले रहे थी।
मुझे मां को इस तरह चोदते हुए लगभग 2 मिनट ही हुए थे। कि मां अआआहहह बेटा अआआहहह के साथ अपना पानी छोड़ने लगी थी। पर मेरा अभी नहीं हुआ था तो मैंने ऐसे ही चोदना जारी रखा।
मैं: मजा आया ना मां?
मां अआआहहह हम्मम कर रही थी।
मैं: मां आपने इतना पानी छोड़ा कि मेरा लंड पूरा गीला कर दिया।
मैंने इतना कह कर लंड मां की चूत से बाहर निकल लिया जिससे अब मां सीधा होकर बैठी और पहली बार मेरा लंड देखी। मां मेरे लंड पर से नज़र नहीं हटा रही थी। जब तक मैंने अपना रूमाल निकाला और लंड को साफ़ किया, और फिर जाकर मां की टांगों को चौड़ा करके उनकी चूत को पोंछने लगा। मां बस मुझे ये सब करते हुए बिना कुछ बोले देख रही थी। मैंने मां की चूत को पोंछ कर उन्हें कूप की दीवार से लगा कर खड़ा करने लगा तो मां बोली-
मां: बेटा बस अब मत कर ये सब (जब तक मैंने मां दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और बोला)।
मैं: मां आपकी चूत को मेरा लंड पसंद आ गया है, तभी तो इतना पानी छोड़ा है।
मां: तेरा बहुत बड़ा है। ये अब और नहीं ले पाऊंगी।
मैं: मां अब तो ये रोज दिन-रात आपकी खातिरदारी करेगा।
इतना बोलते हुए मैंने अपना लंड मां की चूत पर लगा कर एक झटका दे दिया। जिससे मेरा आधे से ज्यादा लंबा लंड उनकी चूत में चला गया और मां कराह उठी व थोड़ा ऊपर को हो गयी। वो अपने पंजों पर आ गयी। मैंने बिना देर किए एक और झटका दे दिया जिससे-
मां: अआआहहह मममा मार दिया हरामी। पूरा लंड मत डाल दर्द हो रहा है। तेरा बहुत बड़ा अअआआहह आररराम से बेटा रररूकक अआहह मममाआ।
पर मैं अब बिना रूके धक्के लगा रहा था और साथ में मां की चूचियां मसलने लगा। फिर से पूरे कूप में थपथप थपथप और अअआआहह बबेटटा अररामम से की आवाजें आ रही थी।
अब मां भी फिर से गर्म हो गयी और मेरे लंड का पूरा मज़ा ले रही थी। कभी मैं उनकी चूचियों को दबाता तो कभी उनकी बड़ी गांड को थप्पड़ जड़ता।
मां: अआआहहह बेटटा हम्ममम करते हुए अपनी गांड पीछे को धकेलने लगी।
मैं लगातार तेज धक्के देता हुआ बोला-
मैं: मां तुम्हारी चूत चोदने में जो मजा आ रहा, आज तक किसी और चूत में नहीं मिला।
मां: अआआहहह बेटा तेजजज।
मैं जोर के झटके देने लगा। हमें ऐसे चुदते हुए लगभग 7-8 मिनट हो गये थे। अब मैं मां के दोनों कूल्हों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए तेज धक्के देने लगा। मां की बड़ी गांड चोड़ी थी जो मुझसे आकर टकरा रही थी। जिससे मां की सिसकारियां और तेज हो गयी।
मां: आहहह अअरराआममम से जजजालिममम अआआह कितना बड़ा है रे तेरा अआआहहह।
थपथप थपथप की आवाजें तेज हो गयी। मुझे मां को चोदते हुए अभी 2 मिनट ही हुए थे कि मां ने अआआहहह बेटा अआआहहह ममममां किया और सिसकियों के साथ कांपते हुए फिर से झड़ गयी। पर मेरा अभी नहीं हुआ था। मैं मां को लगातार तेज झटकों साथ ऐसे ही चोदते जा रहा था। जिससे मां अब कांपते हुए नीचे को बैठने लगी और बोली-
मां: बेटा अआआहहह ममममां अब बर्दाश्त नहीं हो रहा, बस कर।
मैं अब मां को हाथों से संभालते हुए चोद रहा था और बोला-
मैं: मां बस होने वाला है।
मां: अआआहहह अब छोड़ दे, जलन होने लगी।
मैंने एक-दम से चूत से लंड निकाला और सीट तरफ ले जाकर, लिटा कर, उनकी टांगों के बीच आकर मिशनरी पोजिशन में लंड चूत पर टिकाया और एक बार में ही लंड पूरा अन्दर तक घुसा दिया।
इससे मां चीखीं: अआआहहह मां जंगली अअआरराममम से।
मैं एक-दम मां के होंठों को चूसते हुए झटके देने लगा अब मैं मां को तेज झटकों के साथ चोदने लगा। मेरा लंड भी बस पानी छोड़ने वाला था।
मां अआहह हममज्ञ घघघूऊऊ की दबी आवाजें मेरे होंठों को चुसते हुए निकाल रही थी। तभी मेरा लंड फूलने लगा और तेज झटकों के साथ ही झड़ने लगा। इतना पानी पहली बार निकला था मेरा। मैं ऐसे ही मां के होंठों को चूसते हुए उनके पैरों को छोड़ा और उनके ऊपर ही लेट गया। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में ही झटके खा रहा था।
बाक़ी अगले भाग में। दोस्तों अगर आपको मेरी कहानी अगर अच्छी लगी तो कमेंट करें और ईमेल [email protected] करके अपनी फेंटसी को पूरी करने के लिए हमारी सलाह ले। वहां आपकी पूरी जानकारी गोपनीय रहेगी।