हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम दीप्ती पंडित है। मेरी उम्र 22 साल है, मेरी फिगर, 34-28-34 है। मैं दिखने में गोरी-चिट्टी हूं। मेरा जिस्म किसी भी लौंडे का लंड खड़ा करने के लिए काफी है।
मैं बिहार की रहने वाली हूं। मैं काफी शर्मीली हूं, इसलिए कभी किसी लड़के से बात नहीं करती हूं। लेकिन मुझे भी चुदने का बहुत मन होता है जब अपने दोस्तों से उनकी चुदाई की कहानी सुनती हूं। लेकिन यह सपना मेरे सौतेले पापा ने पूरा किया।
मैं अपने मम्मी पापा की एकलौती बेटी हूं। मेरे मम्मी पापा का तलाक 2 साल पहले ही हो गया था। पापा, मेरी मम्मी को शराब पीने के बाद बहुत पीटते थे। लेकिन मम्मी सीधी-सादी थी, इसलिए सब सह लेती थी। मुझे भी बहुत बुरा लगता था, लेकिन हम कर भी क्या सकते थे। तब हमारी ज़िंदगी में आये मेरे नए पापा महेश अंकल। पहले मैं इन्हे अंकल बोलती थी। इनकी वाइफ की डेथ हो गयी थी। एक बेटा है, जो हॉस्टल में रह कर पढ़ाई करता है। उन्होंने मेरे मम्मी से दोबारा शादी की और हमें इस नर्क से निकाले।
शुरु-शुरु में पापा मुझे खूब प्यार करते थे। मम्मी भी अब खूब खुशी से रहती थी। इनका बेटा, अजय जो कि 24 साल का है, वो भी हम माँ-बेटी को प्यार करता था। जब मैं कॉलेज जाने लगी तब मैं घर में थोड़ा छोटे कपड़े पहनने लगी, जैसे हाफ पेंट और नाभि के ऊपर तक टी-शर्ट। तब पापा मुझे घूर के देखते थे। लेकिन मैं इसे ज्यादा सीरियसली नहीं लेती थी। वे कई बार मुझे मेरे जांघो को टच भी कर देते थे।
अजय भी कभी बाइक से मुझे बाजार ले जाता तो खूब ब्रेक मारता था। मुझे भी उससे चिपकने में मजा आता था। एक दिन रात में मैं अकेले सोई थी, और मम्मी-पापा अपने कमरे में सोये थे। अजय हॉस्टल चला गया था। उस रात बड़ी जोर की बारिश हो रही थी। मुझे बिजली के आवाज से बहुत डर लगता था। बिजली की आवाज लगातार आने लगी, तो मैं अपने बेड पर चिल्ला पड़ी।
मेरी आवाज सुन कर मम्मी-पापा दोनों मेरे कमरे में आये। वो मुझे डरा हुआ देख कर अपने कमरे में ले गये और साथ में ही सुला लिए। मैं मम्मी-पापा के बीच में सोई थी। मम्मी दूसरी तरफ मुंह करके सो गयी और पापा मेरी ओर मुंह किये आँख बंद किये थे। मैं भी थोड़ी देर में सो गयी।
थोड़ी देर बाद मुझे मेरे बदन पर किसी का हाथ महसूस हुआ। पहले लगा कि ऐसे ही कुछ होगा, लेकिन धीरे-धीरे हाथ मेरे नंगे पेट से होते हुए, बूब्स के तरफ बढ़े, उउउफ्फ्फ्फ़ मेरी सांसे तेज होने लगी। मैं अभी भी नींद में थी, मुझे लगा कि मैं कोई सपना देख रही थी। थोड़ी देर में मेरे बूब्स प्रेस होने लगे। मैं गरम होने लगी। मेरी चूत गीली होने लगी। तभी मुझे मेरे बूब्स पर दर्द हुआ जैसे किसी ने कस के मसल दिया हो।
मेरी नींद खुल गयी, मैंने देखा, पापा अपना हाथ मेरी टी-शर्ट के अंदर डाल के मेरे बूब्स मसल रहे थे। मैं घबरा गयी, उन्होंने मुझे इस तरह देख कर मेरी मुंह पे अपना हाथ रखा और मुझे चुप रहने का इशारा किया। मैं शांत रही, पापा फिर से मेरे बूब्स मसलने लगे, और धीरे-धीरे नीचे सरकते हुए, मेरी पैंटी के ऊपर से चूत सहलाने लगे। उउउउफ्फ्फ्फ़ मैं मचल उठी, मेरी चूत पहले ही गीली हो रही थी। अब और ज्यादा गर्म हो रही थी।
अब पापा मुझे बाहों में खींचा और मेरे होंठ पर अपने होंठ रख कर चूसने लगे। मेरी आँखे अपने आप ही बंद हो गये। मैं पापा के बालो को सहलाने लगी। पापा मेरे निचले होंठ को चूस रहे थे। मैं अपना जीभ उनके मुंह में डाल दी वे बड़े प्यार से मेरी जीभ को चूसने लगे। पापा मेरे होंठों को चूसते हुए मेरे बूब्स को दबा रहे थे।
बाहर बारिश काफी जोरों से हो रही थी। मम्मी दूसरी तरफ मुंह करके सो रही थी, और इधर पापा मेरे बूब्स दबाते हुए, गुलाबी होंठों को पी रहे थे। उन्होंने मेरी पैंट को उतार दिया। अब मैं केवल पैंटी में थी। मेरी पैंटी चूत के पास गीली हो गयी थी। पापा मेरी गीली पैंटी के पास सूंघने लगे। उउउफ्फ्फ्फ़… मैं अपने पैर को सटा कर चूत को छुपाने लगी। लेकिन पापा ने पैर को चौड़ा किया और पैंटी के ऊपर से जीभ लगा कर चाटने लगे। हहहाययय.. मेरे पापा… आअह्ह्ह्ह… उन्होंने एक झटके में मेरे पैंटी भी उतार दी और मेरे चूत को चाटने लगे।
आआह्ह्ह्ह…. उनकी गर्म जीभ मेरे चूत से लगते ही मैं मचलने लगी। आअह्ह्ह्ह… पापा। वे लगातार मेरी चूत को चाट रहे थे और उसमें एक ऊँगली कर रहे थे। मैं मचल रही थी। उनकी चूत चाटने के अंदाज ने मुझे झड़ने पर मजबूर कर दिया और मैं तेज साँसों के साथ उनके मुंह में झड़ गयी।
फिर पापा मेरे टी-शर्ट और ब्रा को उतार दिये और मुझे पूरा नंगा कर दिये। उन्होंने अपने कपड़े भी निकाले और नंगा हो गये। मैं मम्मी की ओर देखी तो वो दूसरी तरफ मुंह करके सो रही थी। पापा मेरे गाल को चूमते हुए, मेरे कान के पास गये और धीरे से कहा,”तुम अपनी मम्मी की फ़िक्र मत करो, वो सुबह से पहले नहीं उठती है।”
फिर पापा मेरे कानो को चूमे और मेरे बूब्स को बारी-बारी से मुंह में भर के चूसने लगे। ऊऊह्ह्ह्ह पापा… चूसो आअह्ह्ह… मेरे बूब्स को पूरा मुंह में लेके पापा चूस रहे थे। मैं पापा के लंड को हाथ में लेके सहला रही थी। पापा का लंड ढीला था, मैं उसे सहला कर बड़ा कर रही थी लेकिन वह नहीं हुआ।
फिर पापा मेरे बूब्स को चूसने बंद किये और मुझे उठा के बैठा दिये, फिर वो खड़े हो कर अपना लंड मेरे मुंह में डालने लगे। उउउउफ्फ्फ्फ़, उनका लंड मेरे मुंह से लगते ही खड़ा होने लगा। मैंने उनके लंड को अपने मुंह में भर के चूसने लगी। थोड़ी देर में उनका लंड टाइट हो गया।
पापा के लंड को मैं मुंह में लेके चूसती रही। पापा के चेहरे के एक्सप्रेशन से लग रहा था कि वो झड़ जाएंगे। तभी उन्होंने अपना लंड मेरे मुंह से खींच लिया और फिर तकिये के नीचे से एक कंडोम निकाली और लंड पर पहन लिए। मुझे वहीं लेटने को बोले और मेरे पैरों को पेट के पास मोड़ दिये। मेरी चूत खुल के उनके सामने आ गई।
वो अब अपना लंड मेरी चूत पर घिसने लगे। फिर धीरे-धीरे लंड को अंदर धक्का दे दिये। मैं अपना मुंह को अपने हाथ से बंद कर ली। उन्होंने हलके धक्के के साथ मेरी चूत में लंड उतार दिये। चूत गीली थी तो लंड आसानी से चूत में सरक गया। पापा अब मेरे ऊपर लेट गये और अपनी कमर उठा कर मेरी चूत में लंड पेलने लगे।
अअअअअअअह्ह्ह्ह… पापा, मैं शर्म के कारण कभी चुद ना पाती, लेकिन आज आपने मुझे वो सरी खुशिया देदी।
पापा लगातार अपने कमर उठा-उठा कर चोद रहे थे। पापा का पूरा लंड मेरी चूत में जा रहा था। आज मुझे लंड मिला था मैं भी भला कैसे मना कर सकती थी। मैं पापा को पकड़ के उनके होंठ चूमने लगी। पापा और जोश में आ गये और मेरे बूब्स को मसालते हुए मुझे जोर से चोदने लगे। आआह्ह्ह्ह… पापा।
पापा अब मेरे ऊपर से हटे और मुझे कुतिया की तरह बना दिया। अब वो पीछे लंड को चूत में डाल कर चोदने लगे। रूम में फच फच की आवाज आ रही थी। पापा मेरे ऊपर लेट गये और पीछे से मेरी चूत को बजाने लगे। मैं झड़ चुकी थी। लेकिन पापा अभी डटे हुए थे और अभी जोर-जोर से मेरी चूत चोद रहे थे। फिर पापा मुझे सीधा लिटाया और मेरी एक पैर को उठा कर लंड चूत में पेल दिये।
उउउउह्ह्ह… पापा आआह्ह्ह… जोर-जोर से मेरी चूत को चोदते हुए बूब्स को पीने लगे। हम दोनों पूरी तरह चुदाई में गुम हो गये थे कि तभी मम्मी की आवाज आई, “क्या हो रहा है ये सब?”
हम दोनों बाप-बेटी की फट गयी। मम्मी जग गयी थी और एक बाप का लंड बेटी की चूत में देख कर बेहद गुस्से से लाल हो गयी थी। पापा का लंड अभी भी चूत में था। हम दोनों बिल्कुल फ्रीज़ हो गये थे। कुछ समझ नहीं आया कि क्या करें।
अभी यहीं तक, मिलते है अगले भाग में।